कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को बंगलूरू में कांग्रेस ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक में ऐलान किया कि जातिगत जनगणना को लेकर देशभर में अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया और इसका उद्देश्य देशभर में ओबीसी समुदायों की सही सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का पता लगाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रस्तावित जनगणना को ‘बंगलूरू घोषणा’ नाम दिया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार से यह मांग की जाएगी कि पूरे देश में व्यापक जातिगत जनगणना कराई जाए, ताकि हर वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व और सुविधाएं मिल सकें। सिद्धारमैया ने यह भी सुझाव दिया कि इस जनगणना का मॉडल तेलंगाना सरकार द्वारा हाल ही में कराए गए जाति सर्वेक्षण पर आधारित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह जनगणना सिर्फ संख्या तक सीमित न हो, बल्कि इसमें प्रत्येक जाति और व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार और राजनीतिक पहलुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे समाज में समानता बढ़ेगी और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी।
सिद्धारमैया लंबे समय से ओबीसी समुदाय के अधिकारों की पैरवी करते रहे हैं। उनका मानना है कि जातिगत जनगणना से सरकारों को नीतियों के निर्माण और संसाधनों के वितरण में अधिक पारदर्शिता मिलेगी।
यह घोषणा 2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस की ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है।

