गुरुग्राम में 10 जुलाई को हुई टेनिस प्लेयर राधिका यादव की हत्या के मामले में पुलिस की जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राधिका के पिता दीपक यादव ने उसे चार गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया था। आरोपी पिता ने पुलिस को बताया कि वह बेटी की कमाई पर ताने सुन-सुनकर परेशान था और जब राधिका ने उसकी टेनिस एकेडमी बंद करने से इनकार कर दिया, तो उसने गुस्से में आकर यह कदम उठा लिया।
हालांकि, इस बयान को पुलिस ने अपनी जांच का आधार बना लिया है, जिस पर अब कानूनी विशेषज्ञ, रिटायर्ड पुलिस अधिकारी और क्रिमिनल लॉयर्स ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि केवल आरोपी के इकबालिया बयान पर आधारित जांच न केवल कमजोर है, बल्कि कोर्ट में इसका कोई ठोस मूल्य भी नहीं होता। अगर आरोपी कोर्ट में अपने बयान से मुकर गया तो पुलिस के पास पुख्ता सबूतों की कमी पड़ सकती है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील फैमिली मर्डर केस में एक ही थ्योरी पर जांच केंद्रित करना खतरनाक हो सकता है। इससे असली अपराधी को कानूनी फायदा मिल सकता है और न्याय में बाधा आ सकती है। राधिका की हत्या ने समाज और परिवार के स्तर पर गहरी हलचल मचाई है और अब यह केस कानूनी रूप से भी जटिल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुलिस को बयान के अलावा अन्य सबूतों और गवाहों के आधार पर भी गंभीरता से जांच करनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।

