नई दिल्ली: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन ने 37 दिनों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बनाया। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका के मुताबिक, आंदोलन का असर केवल उसके अंतिम नतीजे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे हफ्तों तक चला धरना, सरकार से बातचीत की कोशिश और लंबी राजनीतिक व प्रशासनिक खींचतान शामिल रही।
रांका ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम और सरकार के साथ हुई बातचीत को विस्तार से बताया। उनके अनुसार, CJP का गठन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उस टिप्पणी के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी। इसके बाद NEET-UG 2026 पेपर लीक के मुद्दे ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया।
CJP ने शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ देशभर के युवाओं को लामबंद करने का दावा किया।
37 दिन तक चला जंतर-मंतर पर धरना
रांका के मुताबिक, जून-जुलाई के दौरान CJP ने जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक धरना दिया। इस दौरान संगठन के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सरकार से बातचीत शुरू करने की लगातार कोशिश की।
रांका का दावा है कि करीब एक महीने तक सरकार की ओर से इस मुद्दे पर गंभीर प्रतिक्रिया नहीं मिली और 20 जुलाई तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित करना आसान नहीं है। इसके लिए लोगों को जुटाने, लगातार अभियान चलाने और संगठनात्मक स्तर पर व्यापक तैयारी की जरूरत होती है। इसलिए आंदोलन को केवल उसके अंतिम परिणाम के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
‘हमें वायरस और आतंकवादी तक कहा गया’
CJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को ‘वायरस’ और ‘आतंकवादी’ तक कहा गया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का भी आरोप लगाया।
संगठन के मुताबिक, जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन शुरुआती दौर में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ा। CJP ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाने के साथ कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का भी दावा किया था। संगठन के अनुसार, इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
25 जुलाई को खत्म हुआ आंदोलन, सरकार ने दिए आश्वासन
रांका के मुताबिक, सरकार की ओर से कई आश्वासन मिलने के बाद CJP ने 25 जुलाई को जंतर-मंतर का धरना समाप्त कर दिया।
इनमें प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने और ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने का आश्वासन शामिल था, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया में देरी होती रही।
केस वापस नहीं हुए तो 5 सितंबर को मार्च का ऐलान
मामलों को वापस लेने में देरी से नाराज CJP ने 5 सितंबर को दोबारा मार्च निकालने की घोषणा की। संगठन का आरोप था कि सरकार या तो मामले को टाल रही है या फिर अपने आश्वासनों को लेकर गंभीर नहीं है।
हालांकि, 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने का आदेश दिया।
इसके बाद CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संगठन प्रस्तावित मार्च वापस लेगा।

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