नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने इस मामले के मुख्य प्रतिवादी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उनके कार्यालय को नोटिस जारी करने से फिलहाल परहेज किया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि सवाल केवल नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि कार्यवाही को एक निश्चित समयसीमा के भीतर पूरा करने का है।
अध्यक्ष को नोटिस जारी करने से क्यों बचा कोर्ट?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से लोकसभा अध्यक्ष और उनके कार्यालय को नोटिस जारी नहीं करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह अध्यक्ष की ओर से अदालत में पेश होंगे।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि उन्हें निर्देश मिले हैं कि लोकसभा अध्यक्ष ने संबंधित अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर दिए हैं। इसके बाद पीठ ने 20 सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
क्या है पूरा मामला?
अभिषेक बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें TMC के बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती दी गई है।
यह विवाद TMC के संसदीय दल में कथित विद्रोह के बाद सामने आया। याचिका के मुताबिक, 20 सांसदों ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए एनसीपीआई से जुड़ने की मांग की है और लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग भी की है।
TMC का कहना है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा के लिए चुने गए थे। पार्टी के मुताबिक, बाद में किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़ने का प्रयास दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के दायरे में आता है।
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के सामने भी उठाया था मुद्दा
अभिषेक बनर्जी इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं। उन्होंने इन याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी।
अब सुप्रीम कोर्ट ने 20 सांसदों से जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने अभी इस मामले के अंतिम निपटारे के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।
कौन-कौन हैं TMC के बागी सांसद?
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से जुड़े मामले में जिन 20 सांसदों के नाम बताए गए हैं, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सायोनी घोष, बापी हलदर, एमडी अबू ताहेर खान, कालीपद सारेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मलिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं।
अब इन सांसदों के जवाब और आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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