नई दिल्ली: मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना के शिंदे गुट की नेता शाइना एनसी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी शरिया, हलाला और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है।
शाइना एनसी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को केवल हिंदू धर्मग्रंथों में ही खामियां नजर आती हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करना चाहिए और बाल विवाह तथा बहुविवाह के खिलाफ कानून की बात करनी चाहिए।
‘UCC का समर्थन करें और बाल विवाह बंद करवाएं’
शाइना एनसी ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हमेशा मानते रहे हैं कि हिंदुत्व की सच्चाई धर्मनिरपेक्षता में है।
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग मनुस्मृति को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, उन्हें महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर केवल बयानबाजी करने के बजाय UCC का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने बाल विवाह रोकने और बहुविवाह पर कानून बनाने की भी मांग की।
सीएम योगी ने भी राहुल गांधी पर साधा निशाना
मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के बयान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रतिक्रिया दी। सोमवार को रायबरेली में राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि कोई मनुस्मृति को माने या न माने, लेकिन उसके बारे में गलत तथ्य नहीं बताए जाने चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण, महाभारत और मत्स्य पुराण में मनु की महिमा का उल्लेख मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में मनु का अपमान क्यों किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सनातन परंपरा में जिस काल गणना का पालन किया जाता है, उसे मनु से जोड़ा जाता है और इसी परंपरा के आधार पर सनातनी अपने त्योहार मनाते हैं।
हिमंत बिस्व सरमा ने भी राहुल गांधी पर बोला हमला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी राहुल गांधी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों के पैरोकार नहीं हैं, बल्कि हिंदू विरोधी राजनीति कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सरमा ने दावा किया कि राहुल गांधी महिला सशक्तीकरण के मुद्दे का इस्तेमाल हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी ने शरिया के तहत लागू पितृसत्तात्मक और पुरानी प्रथाओं के खिलाफ कभी इसी तरह आवाज उठाई है।
हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि शरिया इस्लामी न्यायशास्त्र का आधार है, जबकि मनुस्मृति को हिंदू धर्म में ऐसी तुलनीय या सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी संहिता का दर्जा प्राप्त नहीं है।
मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

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