राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण आयोग किशोर न्याय बोर्डों एवं बाल कल्याण समितियों के लंबे समय से रिक्त पदों के मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है।
अपने आदेश में न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे इस याचिका को राजस्थान उच्च न्यायालय के नियम 385-क्यू के तहत मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि इसे जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया जा सके और उचित खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके। इसी क्रम में एडवोकेट अनिरूद्ध पुरोहित को कोर्ट की ओर से न्याय मित्र नियुक्त कर किशोर न्याय समिति एवं रजिस्ट्रार (वर्गीकरण-I), राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर और किशोर न्याय बाल सचिवालय, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के नोडल अधिकारी को न्याय मित्र को उचित सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

