सहारनपुर: उत्तर प्रदेश की सत्ता से करीब एक दशक से बाहर समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं। बुधवार को उनका सहारनपुर दौरा इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में शामिल सहारनपुर में मुस्लिम आबादी करीब 42 फीसदी है। ऐसे में यहां सपा के लिए मुस्लिम समर्थन अहम है, लेकिन पार्टी के सामने कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की स्थानीय पकड़ के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत रखने की चुनौती भी है।
दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी के अलग-अलग गुटों के नेताओं से मुलाकात की और उनसे स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर फीडबैक लिया। उन्होंने सभी नेताओं को सम्मान देने और उनके हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिलाया। पार्टी के भीतर मौजूद खेमेबाजी को उन्होंने स्वस्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर पेश किया।
हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा के सामने चुनौती आसान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मजबूत राजनीतिक पकड़ और भाजपा के संगठनात्मक आधार के बीच सपा को 2027 में मजबूत प्रदर्शन के लिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधना होगा।
कांग्रेस से गठबंधन के बीच इमरान मसूद की चुनौती
राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन टूटने के बाद सपा के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाएं और महत्वपूर्ण हो गई हैं। लेकिन सहारनपुर में कांग्रेस से तालमेल के बावजूद इमरान मसूद की राजनीतिक मौजूदगी सपा के लिए चुनौती बनी हुई है।
ऐसे में अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के स्थानीय मुस्लिम नेताओं को आगे कर इस चुनौती का मुकाबला करने की रणनीति पर काम करते दिख रहे हैं। उनके सहारनपुर दौरे में सपा के युवा मुस्लिम विधायक आशु मलिक और उमर अली नजर आए। पूर्व सांसद हाजी फजलुरहमान कुरैशी और कैराना की सांसद इकरा हसन भी उनके साथ मौजूद थीं।
इन नेताओं की मौजूदगी को सहारनपुर और आसपास के इलाकों में सपा के मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
यशपाल सिंह के परिवार को तवज्जो, गुर्जर समीकरण पर नजर
अखिलेश यादव ने सपा के पूर्व नेता चौधरी यशपाल सिंह के दोनों बेटों चौधरी रुद्रसेन और चौधरी इंद्रसेन को भी विशेष महत्व दिया। गुर्जर समुदाय से आने वाले यशपाल सिंह का पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रहा है।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले दोनों भाइयों में से किसी एक को विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा। इसे

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