कोलकाता, तारातला वेयरहाउस | 24 जून 2026, (4:35PM) बुधवार दोपहर को एक दर्दनाक हादसा हुआ। निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम (वेयरहाउस/शेड) की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी और पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।
हादसा दोपहर करीब 12:20 बजे हुआ। स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी की लीज पर Behera Brothers द्वारा 30 साल की लीज पर ली गई जमीन पर बहुमंजिला गोदाम और कोल्ड स्टोरेज सुविधा का निर्माण चल रहा था। उसी दौरान कंक्रीट कास्टिंग (छत डालने) का काम किया जा रहा था। साइट पर अनुमानित 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे।
अचानक भारी लोहे के बीम, कंक्रीट स्लैब और पूरी छत का बड़ा हिस्सा नीचे गिर पड़ा। चश्मदीदों के अनुसार, पहले जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई, उसके बाद धूल का घना गुबार उठा और मलबा चारों ओर फैल गया। कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। शुरुआती अनुमानों में 18 से 40 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई।
तत्काल प्रतिक्रिया और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही कोलकाता पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF, SDRF, सिविल डिफेंस और कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। मलबे के नीचे से लगातार चीख-पुकार और मदद की आवाजें सुनाई दे रही थीं।
मजदूरों तक पानी, ऑक्सीजन और संचार सुविधा पहुंचाई गई। हाई-राइज लैडर, हाइड्रोलिक क्रेन, गैस कटर और जेसीबी मशीनों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों का हालचाल लेने अस्पताल भी गए।
मौतें और घायल
शुरुआत में 3 से 5 मौतों की खबर सामने आई थी। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ती गई।
25 जून तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
इनमें 10 लोगों की मौत घटनास्थल या तुरंत बाद हुई, जबकि एक मजदूर ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
घायलों की संख्या 19 से 25 के बीच बताई गई, जिनका इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है।
पीड़ितों में उत्तर 24 परगना, नदिया, पूर्व बर्धमान, कृष्णानगर, श्यामनगर, मेटियाब्रुज, बसंती और बिहार के मुंगेर के मजदूर शामिल हैं। सामने आए नामों में कृष्णा चौधरी (30), रोहित चौधरी (40) और राहुल चौधरी (17) शामिल हैं।
बचाव अभियान का विस्तार
24 घंटे से अधिक समय बाद भी बचाव अभियान जारी रहा। सेना ने एडवांस्ड Ground Penetrating Radar (GPR) सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिससे मलबे के नीचे हलचल और पल्स सिग्नल का पता लगाया जा सका। कैमरे और अन्य विशेष उपकरण भी लगाए गए। मोबाइल टावर डेटा की मदद से फंसे लोगों के मोबाइल फोन की लोकेशन भी ट्रेस की गई।
कुछ मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला गया। कुल मिलाकर करीब 30 लोगों का सफल रेस्क्यू किया गया। बीच-बीच में हुई भारी बारिश ने राहत कार्य को प्रभावित किया, लेकिन सभी टीमें लगातार युद्धस्तर (War Footing) पर जुटी रहीं।
जांच, गिरफ्तारियां और आरोप
कोलकाता पुलिस ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए Culpable Homicide Not Amounting to Murder सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। FIR मालिकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दर्ज की गई।
अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल हैं-
- शंभुनाथ बेहेरा (निर्माण मालिक)
- कमल सामंता (स्ट्रक्चरल इंजीनियर)
- गुलजार हुसैन (सुपरवाइजर)
- मोहम्मद अताउल (लेबर सप्लायर)
- सुभाष चौधरी, दीबाकर भंडारी सहित अन्य संबंधित लोग
जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अनुमति संबंधी कमियों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।
सरकारी और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटनास्थल पर पहुंचकर कहा कि सभी एजेंसियां मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।
ताजा अपडेट (26 जून 2026 तक)
- मृतकों की संख्या 11 पर पहुंच चुकी है।
- बचाव अभियान 24 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा।
- अधिकांश फंसे मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है या उनका पता लगा लिया गया है।
- 5 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
- घायलों का इलाज जारी है।
- निर्माण में लापरवाही के एंगल से जांच तेज कर दी गई है।
यह हादसा निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की कमी और गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। कई परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही, लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा दिलाना अभी भी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

