नई दिल्ली/बेंगलुरु: नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के बाद अब देश के एक और प्रतिष्ठित कानून संस्थान में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने को लेकर विरोध सामने आया है। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के छात्रों और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने शनिवार को एक संयुक्त पत्र जारी कर NALSAR के छात्रों के प्रति बिना शर्त एकजुटता जताई। पत्र में BCI अध्यक्ष के आचरण और NLSIU के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
‘मुद्दा सिर्फ मुख्य अतिथि का नहीं’
छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा कि यह विवाद केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि कौन होगा। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या देश के शीर्ष कानून संस्थानों के छात्र शक्तिशाली संस्थाओं और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के फैसलों से असहमति व्यक्त कर सकते हैं, बिना अपने पेशेवर भविष्य पर किसी संभावित असर के डर के।
संयुक्त बयान में NALSAR के छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा गया कि उन्होंने सत्ता के सामने अपनी बात रखने का साहस और नैतिक प्रतिबद्धता दिखाई है।
BCI से बिना शर्त माफी की मांग
NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने BCI से NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
पत्र में यह सवाल भी उठाया गया कि विवादित आदेश जारी करने के लिए BCI अध्यक्ष ने परिषद के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किस आधार पर किया।
NALSAR से शुरू हुआ विवाद
NLSIU में यह विरोध ऐसे समय सामने आया है जब हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर विवाद सुर्खियों में है।
विवाद के दौरान BCI की ओर से NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, आदेश कुछ ही समय बाद वापस ले लिया गया। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बाद में इस फैसले पर खेद भी जताया था।
इस पूरे घटनाक्रम ने कानून के छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बार काउंसिल की भूमिका और देश के प्रमुख कानून संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर बहस छेड़ दी है।
CJI सूर्यकांत ने NALSAR कार्यक्रम में सहमति से किया इनकार
NALSAR विवाद के बीच CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए कभी सहमति नहीं दी थी। ऐसे में उनके नाम को मुख्य अतिथि के तौर पर लेकर शुरू हुआ विवाद एक अलग दिशा में चला गया।
NALSAR और BCI के बीच हुए घटनाक्रम के बाद अब NLSIU में सामने आया विरोध इस मुद्दे को और व्यापक बना रहा है।
NLSIU और BCI के बीच पुराना संस्थागत संबंध
NLSIU और BCI के बीच लंबे समय से संस्थागत संबंध रहे हैं। विश्वविद्यालय की संचालन व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश और BCI अध्यक्ष की भूमिकाएं भी रही हैं।
साल 2025 में आयोजित NLSIU के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत ने की थी, जबकि मनन कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया था।
ऐसे में इस बार CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे कानून संस्थानों की स्वतंत्रता, छात्रों की अभिव्यक्ति और संस्थागत संबंधों से जुड़े व्यापक सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
फिलहाल NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बीच यह मामला देश के शीर्ष कानून संस्थानों में अकादमिक स्वतंत्रता और असहमति के अधिकार को लेकर जारी बहस का नया केंद्र बन गया है।

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