बीएमसी चुनाव में भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को स्पष्ट जनादेश मिलने के बावजूद, नतीजों के बाद मुंबई की राजनीति में उथल-पुथल तेज हो गई है. खासतौर पर शिवसेना (शिंदे गुट) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
मुंबई महानगरपालिका की 227 सीटों के नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए. इसके ठीक अगले दिन, 17 जनवरी को शिंदे गुट से चुने गए सभी 29 नगरसेवक बांद्रा स्थित एक होटल में एकत्र हुए. पहले इसे संगठनात्मक बैठक बताया गया, लेकिन जल्द ही इस पर सियासी विवाद खड़ा हो गया.
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने आरोप लगाया कि शिंदे गुट ने अपने नगरसेवकों को जानबूझकर होटल में ‘छिपाकर’ रखा है, ताकि भाजपा उन्हें अपने पाले में न कर सके. इसी आरोप के साथ यह दावा भी किया गया कि नगरसेवकों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है.
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मामले में तीखा बयान देते हुए कहा कि शिंदे गुट के नगरसेवक वस्तुतः कैद में हैं. राउत ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह पहले विधायकों को तोड़कर सत्ता हासिल की गई, अब उसी डर से अपने ही नगरसेवकों को नजरबंद रखा जा रहा है.
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार और भाजपा पर हमला बोला है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि भाजपा मेयर पद हासिल करने के लिए संख्या बल बढ़ाना चाहती है, इसी आशंका के चलते शिंदे गुट ने अपने नगरसेवकों को होटल में ठहराया है. महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष नसीम खान ने भी भाजपा पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए.
मुंबई मेयर पद को लेकर चल रही इस रस्साकशी ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है.

