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महिलाओं में PCOD और PCOS क्यों होता है? यहां जानें कारण और लक्षण

by | Sep 4, 2025 | हेल्थ

PCOD /PCOS Symtoms : परिवार और घर का ख्याल रखते- रखते महिलाए खुद का ख्याल रखना भूल गई हैं। जिसके कारण कई गंभीर बीमारियां ने महिलाओं को जकड़ना शुरू कर दिया है। केवल महिलाएं ही नहीं बच्चियों को भी ये बीमारियां छोड़ नहीं रही हैं। महिला और लड़कियां में आजकल PCOD और PCOS काफी कॉमन हो गया है। PCOD (Polycystic Ovarian Disease) और PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) दोनों महिलाओं की प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हैं। PCOD में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जबकि PCOS एक व्यापक हार्मोनल विकार है जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। आइये जानते हैं कि ये बीमारी महिलाओं के लिए कितनी खतरनाक है इसके लक्षण क्या है… कैसे इससे बचा जा सकता है….

दोनों बीमारियों के मुख्य कारण क्या हैं..

  1. हार्मोनल असंतुलन
  • इंसुलिन रेसिस्टेंस: शरीर में इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग न होना
  • एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता: पुरुष हार्मोन का बढ़ना
  • LH और FSH हार्मोन का असंतुलन: ओव्यूलेशन प्रक्रिया में बाधा
  1. आनुवंशिक कारक
  • पारिवारिक इतिहास में PCOD/PCOS होना
  • जेनेटिक प्रवृत्ति का 60-70% योगदान
  • माता या बहन को यह समस्या होने पर खतरा बढ़ जाता है
  1. जीवनशैली संबंधी कारण
  • गलत खान-पान: अधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड का सेवन
  • मोटापा: BMI का 25 से अधिक होना
  • व्यायाम की कमी: शारीरिक गतिविधि न करना
  • अनियमित दिनचर्या: देर से सोना, खाने का गलत समय

इंसुलिन रेसिस्टेंस का प्रभाव

जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पातीं, तो पैंक्रियास अधिक इंसुलिन बनाता है। यह अतिरिक्त इंसुलिन अंडाशय को अधिक एंड्रोजन हार्मोन बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे ओव्यूलेशन में समस्या होती है।

तनाव और पर्यावरण का का योगदान

  • कॉर्टिसोल हार्मोन: लंबे समय तक तनाव से कॉर्टिसोल बढ़ता है
  • हार्मोनल चक्र में व्यवधान: तनाव से प्रजनन हार्मोन प्रभावित होते हैं
  • नींद की कमी: नींद से हार्मोनल असंतुलन
  • प्रदूषण: वायु और जल प्रदूषण का प्रभाव
  • केमिकल एक्सपोज़र: प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स में हानिकारक रसायन
  • एंडोक्राइन डिसरप्टर्स: हार्मोन सिस्टम को बिगाड़ने वाले पदार्थ

खाने पर विशेष ध्यान देना जरूरी

डेस्क जॉब ने भी इस समस्या को और बढ़ाया है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी और मेटाबॉलिज्म का धीमा होना PCOD/PCOS के विकास में योगदान देता है। इसके अलावा डायबिटीज टाइप 2, हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड की समस्याएं भी इस स्थिति को जटिल बना देती हैं। साथ ही आजकल खानपान भी इसकी मुख्य वजह बना हुआ है। फास्ट फूड और खाने वाली सामग्री में मिलावट इसकी सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।

ऐसे रखें अपना ख्याल….

उम्र भी एक महत्वपूर्ण कारक है। 15 से 44 वर्ष की प्रजनन उम्र में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। युवावस्था में हार्मोनल बदलाव के दौरान इसकी शुरुआत होना काफी आम है। हार्मोनल चक्र की सामान्य प्रक्रिया में व्यवधान के कारण फॉलिकल्स का पूरा विकास नहीं हो पाता और छोटे सिस्ट बन जाते हैं। रोकथाम के लिए सबसे महत्वपूर्ण है जीवनशैली में सुधार। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आहार का सेवन करना, नियमित व्यायाम करना, तनाव का सही प्रबंधन करना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेना और नियमित जांच कराना भी इस समस्या को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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