Supreme Court on Retirement Age: जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राज्यों से सकारात्मक रुख अपनाने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला अदालतों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल करने के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा है।
पीठ में न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी आम सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अपेक्षाकृत देर से सेवा में आते हैं। ऐसे में उन्हें 62 वर्ष की उम्र तक सेवा में बनाए रखने से राज्यों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
राज्यों की वित्तीय दलील पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक
कुछ राज्यों ने जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके यहां अन्य सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 58 या 60 साल है। नगालैंड ने भी इसी आधार पर अपनी चिंता जाहिर की।
वहीं, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने इस प्रस्ताव को लागू करने में वित्तीय चुनौतियों का हवाला दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की दलीलों पर असहमति जताते हुए कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को सेवा में बनाए रखना नए पदों को भरने और सेवानिवृत्ति से जुड़े खर्च की तुलना में अधिक व्यावहारिक और कम खर्चीला हो सकता है।
पीठ ने राज्यों के महाधिवक्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने मुख्यमंत्रियों को इस मामले में नियमों का पालन करने और प्रस्ताव पर सकारात्मक तरीके से विचार करने के लिए मनाने का प्रयास करें।
इन राज्यों ने जताई सहमति
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों ने जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की अलग-अलग राय को ध्यान में रखते हुए उनसे इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने और सकारात्मक प्रतिक्रिया देने को कहा है।
‘अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को बनाए रखना कम खर्चीला’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों के सेवा में बने रहने से राज्य पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ उनकी सेवानिवृत्ति के बाद होने वाले खर्च से कम होगा। अदालत ने यह भी कहा कि केवल वित्तीय बोझ का हवाला देकर रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध उचित नहीं है।
पीठ ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को राज्यों और न्यायपालिका के बीच आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्यों को मामले पर तत्काल पुनर्विचार करने और दो सप्ताह के भीतर स्वतंत्र एवं व्यावहारिक फैसला लेने को कहा है।
रिटायरमेंट उम्र बढ़ी तो बीच में रिटायर होने वालों को भी मिलेगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई राज्य न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने का फैसला करता है, तो इसका लाभ उन अधिकारियों को भी मिलेगा जो इस दौरान रिटायर हो चुके होंगे।
अदालत ने इससे पहले भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल करने पर विचार करने को कहा था।
17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें देशभर की जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को करेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 साल, जबकि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल है। ऐसे में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का यह रुख काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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