नवरात्रि का पर्व आते ही हर घर–आंगन में मां दुर्गा के जयकारे गूंजते हैं। आस्था, शक्ति और साधना का ये पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि इतिहास और परंपरा का ऐसा अध्याय है, जिसने मानवता को सत्य और असत्य की परख भी सिखाई। जब-जब धरती पर अधर्म और अन्याय ने सिर उठाया, तब-तब शक्ति की साधना ने धर्म की रक्षा की। यही वजह है कि नवरात्रि का व्रत केवल आराधना नहीं, बल्कि आत्मबल का शंखनाद है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम रावण से युद्ध करने निकले, तो उससे पहले उन्होंने नवरात्रि का व्रत रखा। तप और साधना की इस शक्ति ने ही उन्हें विजय का मार्ग दिखाया। लंका पर चढ़ाई से पहले माँ दुर्गा की आराधना कर राम ने ये विश्वास जताया कि शक्ति और नीति का साथ मिलकर ही विजय की गाथा रच सकता है। और यहीं से लिखी गई थी रावण-वध की अमर कहानी।
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