I-PAC मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ED की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से जानबूझकर हंगामा करने की योजना बनाई गई थी।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। बहस की शुरुआत में तुषार मेहता ने I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर हुई तलाशी का जिक्र करते हुए डीजीपी राजीव कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान डीजीपी मुख्यमंत्री के साथ मौके पर पहुंचे थे।
तुषार मेहता ने आगे बताया कि पिछले शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान की पूरी घटनाक्रम को आज सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। उन्होंने अदालत को एक WhatsApp चैट की प्रति भी दिखाई, जिसमें टीएमसी नेता रामा हलदर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भीड़ जुटाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
ED का आरोप है कि इसके लिए एक WhatsApp ग्रुप बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अदालत परिसर में लोगों को इकट्ठा कर हंगामा करना था, ताकि ईडी की याचिका पर सुनवाई टल सके। ये संदेश टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा अलग-अलग ग्रुप में साझा किए गए थे। बताया गया कि “लीगल माइंड” नाम के WhatsApp ग्रुप के जरिए यह मैसेज फैलाए गए।

