वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह के बारे में बताया गया है। इन्ही ग्रहों की ज्योतीषीय गणना के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है। ज्योति। में शुक्र ग्रह को रोमांस, काम वासना. सौंदर्य, भौतिक सुख, वैवाहिक जीवन, शौहरत, कला और भोग-विलास का कारक ग्रह माना जाता है। शुक्र ग्रह को दो राशियों का स्वामी प्राप्त है।
शुक्र ग्रह की महादशा 20 साल तक चलती है। जब किसी जातक की जन्म कुंडली में शुक्र शुभ होते हैं तो व्यक्ति के जीवन में उसे कई तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। व्यक्ति थोड़े से प्रयासों में जल्द धनवान बन जाता है। वहीं जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी नहीं होती तो व्यक्ति के सुखों में कमी और वैवाहिक जीवन में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

