भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। रेपो रेट 5.5% पर बरकरार रखा गया है। यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। आरबीआई ने पहले ही तीन बार रेपो रेट में कटौती की थी, जिससे यह दर 6.5% से घटकर 5.5% पर आ गई थी|
क्यों नहीं हुई कटौती?
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी शुल्क नीति के कारण आरबीआई सतर्क रुख अपना रहा है।
- महंगाई दर आरबीआई के लक्ष्य के भीतर है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में कटौती नहीं की गई है।
- आरबीआई ने पिछले रेट कट का असर देखने के लिए अभी समय की जरूरत बताई है।
आम जनता पर क्या असर?
- होम लोन, एजुकेशन लोन और कार लोन की ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा।
- अगर कटौती होती, तो इससे लोन सस्ते हो सकते थे और लोगों को राहत मिल सकती थी।
- विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई की इस बार की मौद्रिक नीति में दरों को स्थिर बनाए रखने की संभावना थी।

