मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन, विपक्षी सांसदों ने लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मकर द्वार पर कोविड विरोध प्रदर्शन किया। उनका मुख्य आरोप था कि बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उपयोग मतदाता सूची को प्रभावित करने और चुनाव में पक्षपात करने के लिए किया जा रहा है। इसी क्रम में विपक्ष ने पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे समस्याग्रस्त मुद्दों पर सदन में चर्चा और प्रधानमंत्री द्वारा जवाब की मांग की, लेकिन जब मांग पूरी नहीं हुई, तो हंगामा शुरू हो गया और लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
गेट के बाहर प्रदर्शन के वक्त विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस के राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, साथ ही I.N.D.I.A. गठबंधन के कई अन्य सांसद शामिल हुए। उन्होंने मकर द्वार के पास जोरदार नारेबाजी की और सरकार द्वारा मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ध्यान देने की सार्वजनिक रूप से मांग की। विपक्ष का कहना है कि SIR के चलते गरीब और वंचित वर्ग के मतदाताओं को सूची से बहिष्कृत करने का प्रयास हो सकता है, जो लोकतंत्र की जड़ीलता को चुनौती देता है।
दूसरी ओर, प्रदर्शन से पहले संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बैठक आयोजित हुई, जिसमें केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। इसी समय, I.N.D.I.A. गठबंधन के नेता भी एक रणनीतिक बैठक कर रहे थे, जिसमें आगामी सत्र में विपक्ष के एजेंडे तथा विरोध की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मांग रही कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, साथ ही सरकार को उच्च न्यायालय और संसद दोनों के समक्ष जवाबदेह बनाया जाए। विपक्ष का तर्क है कि लोकतंत्र को मजबूत रखने के लिए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता संपोषित करना अनिवार्य है। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे तथा सत्यता की लड़ाई जारी रखेंगे।

