उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अंतर्गत सौंपा, जिसमें किसी भी उपराष्ट्रपति को लिखित रूप में इस्तीफा लेने की प्रक्रिया निर्धारित है। 21 जुलाई 2025 की रात को यह निर्णय अचानक सामने आया, जबकि उनका तीन साल का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था ।
इस्तीफे का मुख्य कारण उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताई—आइएमएस अस्पताल में मार्च माह में कार्डियक इश्यू को लेकर भर्ती और जून में ऊत्तarakhand में गिरने की घटना के बाद स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई थीं धनखड़ की इस्तीफा पत्र में उल्लेख था:
“स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने हेतु, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत का उपराष्ट्रपति पद त्यागता हूँ…”।
उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रियों और सांसदों को सहयोग एवं विश्वास के लिए आभार भी जताया । पीएम मोदी ने भी उनकी शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की राज्यसभा में उनके इस्तीफे की घोषणा घनश्याम तिवाड़ी ने की, और धनखड़ आज सदन की कार्यवाही में भी उपस्थित नहीं हुए । मानसून सत्र की शुरुआत जद(यू) सांसद हरिवंश द्वारा सुबह 11 बजे की गई, जबकि इस्तीफे की खबर से सदन में हलचल मची
इस इस्तीफे के साथ, वे उन कुछ उपराष्ट्रपतियों में शामिल हो गए जिन्होंने अपने कार्यकाल को पूरा नहीं किया, जैसे वी.वी. गिरि, भैरों सिंह शेखावत और कृष्णकांत । अब उपराष्ट्रपति पद रिक्त हो गया है और एक नए उपराष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी

