राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए सबसे पहले लोगों को अपने मन से जाति की भावना निकालनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि समाज ईमानदारी से प्रयास करे, तो आने वाले 10 से 12 वर्षों में जातिवाद को खत्म किया जा सकता है।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक जन संगोष्ठी में भागवत ने कहा कि प्रारंभ में जाति का संबंध व्यक्ति के कार्य और पेशे से था, लेकिन समय के साथ यह सामाजिक भेदभाव का कारण बन गई। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मानसिकता को बदलें और समानता को अपनाएं।
भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य स्वयं का विस्तार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण के माध्यम से भारत को उसके सर्वोच्च गौरव तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को साथ लेकर चलना संघ की मूल सोच है।
इस कार्यक्रम में प्रांत संघचालक अनिल भालेराव भी मंच पर उपस्थित रहे। जनता के सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने दोहराया कि जातिवाद जैसी समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक परिवर्तन से संभव है।

