‘मेरी ड्यूटी मंगलवार रात रहीमाबाद स्टेशन पर थी। रात के दो बजे का समय था। काशी-विश्वनाथ ट्रेन के ड्राइवर ने ट्रैक पर लकड़ी का टुकड़ा देख लिया था। उन्होंने स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी। फिर स्टेशन मास्टर ने मुझे घटनास्थल पर भेजा। मेरे साथ RPF का एक कर्मचारी भी था। थोड़ी दूरी पर एक 10 फीट लंबा बांस रखा हुआ था, जिसमें लाल झंडा लगा था। हमने दोनों को हटाया। अगर 5 मिनट की भी देरी हो जाती तो गरीब रथ ट्रेन पलट सकती थी, जिसमें हजारों लोग मारे जाते।’
यह कहना है लखनऊ के रहीमाबाद रेलवे स्टेशन पर मंगलवार रात तैनात पॉइंटमैन किशनलाल का। उसी रात गरीब रथ ट्रेन को पलटाने की साजिश रची गई थी। यह एक महीने के भीतर तीसरी घटना है, जब ट्रेन को पलटाने की साजिश की गई। इससे पहले 24 मार्च को दिलेर नगर रेलवे लाइन पर रॉड और अप्रैल के पहले सप्ताह में लकड़ी रखी मिली थी।

