जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने के बीच अब घाटी की मस्जिदों और धार्मिक संस्थानों की प्रोफाइलिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी भर में मस्जिदों और उनसे जुड़े धार्मिक पदाधिकारियों की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें व्यक्तिगत, आर्थिक और वैचारिक विवरण मांगे जा रहे हैं।
पुलिस की इस पहल को लेकर मौलवियों, राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की कवायद धार्मिक स्वतंत्रता में दखल के समान है और इससे समुदाय में डर का माहौल पैदा हो सकता है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों की प्रोफाइलिंग धर्म के मामलों में सीधा हस्तक्षेप है। महबूबा मुफ्ती ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार ऐसा ही करना चाहती है तो मंदिरों में भी यह तय करे कि कौन-सा वर्ग किस मंदिर में जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम मुसलमानों को मस्जिदों से दूर रखने की एक तरह की चेतावनी जैसा है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने घाटी की कई मस्जिदों को चार पन्नों का एक फॉर्म भेजा है। इसमें से एक पेज में मस्जिद से जुड़ी सामान्य जानकारी मांगी गई है, जबकि बाकी तीन पेज मस्जिद प्रबंधन, इमामों और अन्य धार्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के विवरण के लिए हैं। इस कवायद को लेकर घाटी में बहस तेज हो गई है।

