नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर किसी साधारण नेता की कहानी नहीं, बल्कि सत्ता की रणनीति, जनसमर्थन और नेतृत्व क्षमता का दुर्लभ उदाहरण है। ज्योतिषियों की मानें तो उनकी कुंडली में राजयोग दर्ज है—और राजनीति ने इसे सच भी कर दिखाया।
2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद से जो यात्रा शुरू हुई, वह अब तक बिना किसी विराम के शीर्ष सत्ता तक पहुंच चुकी है। मोदी चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री चुने जा चुके हैं। खास बात ये कि उन्होंने न तो कोई पंचायत चुनाव लड़ा था, न ही कभी मंत्री या सांसद रहे—वे सीधे नेतृत्व की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचे और 24 वर्षों से सत्ता में निरंतर बने हुए हैं।
इतिहास गवाह है कि मोदी से पहले भी पांच मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे—मोरारजी देसाई, चरण सिंह, वी.पी. सिंह, पी.वी. नरसिंह राव और एच.डी. देवेगौड़ा। लेकिन इनमें से कोई भी न तो मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा कर सका और न ही प्रधानमंत्री पद पर लंबे समय तक टिक पाया। मोदी इस मायने में एक अपवाद हैं—सत्ता में स्थिरता और लोकप्रियता के प्रतीक।
राजनीतिक विरोध चाहे जितना तीखा रहा हो, मोदी की स्थिति कभी डगमगाई नहीं। आलोचकों ने भले ही बार-बार भविष्यवाणी की हो कि “अब जाएंगे, तब जाएंगे”, लेकिन हर बार मोदी पहले से कहीं अधिक मज़बूती से लौटे। पार्टी के अंदर हो या बाहर, विरोधी उनके प्रभाव को चुनौती नहीं दे सके।
एक के बाद एक चुनावी जीत, ज़मीनी रणनीति, और जनता से सीधा संवाद उनकी राजनीतिक शैली के अहम पहलू रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में नेतृत्व का एक नया मॉडल स्थापित किया है—जहां सिर्फ कुर्सी नहीं, जनता का भरोसा भी लगातार उनके साथ खड़ा है।

