उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से पद से इस्तीफा दे दिया—जो उनकी कार्यकाल की आधिकारिक समाप्ति (10 अगस्त 2027) से लगभग दो साल पहले हुआ । उनके पत्र में उन्होंने अपनी तबीयत को प्राथमिकता देने की बात कही और भारतीय लोकतंत्र की सेवा का सम्मान व्यक्त किया ।
इस अचानक इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि उनके सरकारी आवास और ऑफिस को तत्काल बंद कर दिया गया और उन्हें तुरंत खाली करने का आदेश भेजा गया। एक निजी चैनल की वायरल स्क्रीनशॉट में यह दावा पुष्ट किया गया कि उनके सोशल मीडिया टीम को भी हटाया गया । इस खबर पर यूज़र गोविंद प्रताप सिंह ने लिखा कि “जगदीप धनखड़ को घर खाली करने का नोटिस भेजा गया। दफ्तर सील हुआ, रंग-दिखाई विदाई??”।
हालांकि, केंद्र सरकार की PIB फैक्ट-चेक यूनिट ने इन सभी दावों को फर्जी करार दिया। PIB ने स्पष्ट किया कि न तो किसी ऑफिस को सील किया गया, न तत्काल सरकारी आवास खाली करने का कोई नोटिस भेजा गया—और ट्विटर (X) पर ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं । सरकार ने यह भी बताया कि उनकी ऑफिस अब भी पूरी तरह से सक्रिय और कार्यशील है, और महत्वपूर्ण बैठकें नियमित रूप से जारी हैं।
वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स कुछ तथ्य भी सामने ला रही हैं—उनके इस्तीफे की रात से ही पैकिंग शुरू हो गई थी, और अगले कुछ दिनों में वे वीपी एनक्लेव खाली करके टाइप‑VIII सरकारी बंगले में शिफ्ट हो सकते हैं—जोकि नियमों के अनुसार उनके अधिकार में है। नोर्म्स के तहत पूर्व उपराष्ट्रपतियों को आजीवन सरकारी आवास का हक होता है ।
राजनीतिक स्तर पर, विपक्ष ने धनखड़ के इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य से अधिक “गहराई में कुछ और” होने की आशंका जताई है , जबकि भाजपा ने इसे केवल स्वास्थ्य संबंधी निर्णय कहा है और चुनाव आयोग को नया उपराष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ।

