राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग The National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने बिल्डर्स को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे उपभोक्ता मामलों में, रिफंड ही नहीं ब्याज के साथ मुआवजा देने के लिए बाध्य हैं. जस्टिस सुदीप अहलूवालिया और साधना शंकर की आयोग की बेंच एक बिल्डर द्वारा राज्य आयोग के आदेशों के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर यह फैसला सुनाया.
राज्य आयोग ने अपनी जांच में बिल्डर की सेवा के मामले में कई खामियां पाई थी और शिकायतकर्ता को 12 फीसदी ब्याज के साथ 34,27,747 रुपये, मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये और मुकदमेबाजी लागत के रूप में 11,000 रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया था.
मामला साल 2011 का है. जब शिकायतकर्ताओं ने चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर बरनाला बिल्डर्स द्वारा एक प्रोजेक्ट में एक फ्लैट बुक कराया था, जिसके बारे में विज्ञापन के जरिए यह दावा किया गया था कि यह पूरी तरह से तैयार है और इसमें किसी तरह का कोई कानूनी मसला भी नहीं हैं. उन्होंने फ्लैट की कुल कीमत का एक बड़े हिस्से का भुगतान भी कर दिया.

