इथेनॉल को लेकर बीते कुछ समय में देशभर में बहस छिड़ी रही। कई लोगों ने आरोप लगाए कि इसके उपयोग से उनके वाहन खराब हो रहे हैं, और इसका जिम्मेदार केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को ठहराया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने आरोपों को खारिज कर दिया। इस पर गडकरी ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों का नतीजा है।
नागपुर में एग्रीकोस वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा,
“लोग सोचते हैं मैं पैसा कमाने के लिए ये सब कर रहा हूं। सच तो यह है कि मेरा दिमाग ही हर महीने 200 करोड़ रुपये कमा सकता है। मुझे पैसे की कमी नहीं है और न ही मैं किसी के सामने गिरता हूं। मैं कोई दलाल नहीं हूं। मैं ईमानदारी से कमाना जानता हूं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किए जा रहे प्रयोग और योजनाएं किसानों की भलाई के लिए हैं, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।
“नेता लोगों को लड़ाना जानते हैं”
गडकरी ने अपने संबोधन में राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि
“नेता जानते हैं कि किस तरह लोगों को आपस में लड़वाकर राजनीतिक लाभ उठाया जा सकता है। लेकिन अब पिछड़ापन भी एक राजनीतिक स्वार्थ का औजार बन गया है।”
“मैं संत नहीं हूं, लेकिन संवेदनशील जरूर हूं”
गडकरी ने यह भी कहा कि वे कोई संत नहीं हैं, बल्कि एक आम इंसान हैं जिनका परिवार और घर है। लेकिन विदर्भ क्षेत्र में हजारों किसानों की आत्महत्याओं को वह एक गंभीर त्रासदी मानते हैं।
उन्होंने कहा,
“जब तक हमारे किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध नहीं हो जाते, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। ये बदलाव किसानों के लिए है, न कि किसी निजी फायदे के लिए।”

