कई नामी बीमा कंपनियों के पॉलिसीधारक मुश्किल में हैं. उन्हें 1 सितंबर से अस्पताल में कैशलेस सुविधा नहीं मिल पाएगी. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स द्वारा इस सेवा को निलंबित करने के निर्णय के बाद लोगों को इसका सामना करना पड़ेगा. अस्पताल और बीमा कंपनियों की इस लड़ाई के बीच जीएसटी रिफॉर्म पर भी काम किया जा रहा है. खुद पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से इसका ऐलान किया था. ऐसे में हेल्थ इश्योरेंस पर जनता के लिए अच्छी खबर है या बुरी, आइए जानते हैं.
जानकार कहते हैं कि अगर प्रीमियम को जीएसटी से मुक्त कर दिया जाए, तो स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में तेज़ी आएगी. नेशनल इंश्योरेंस की सीएमडी राजेश्वरी सिंह मुनि ने कहा कि कीमतों में गिरावट से ज्यादा खुदरा ग्राहक आकर्षित होंगे और मौजूदा ग्राहक भी राशि बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं. केंद्र सरकार जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को जीएसटी से मुक्त करने पर विचार कर रही है. सिंह मुनि ने कहा, आज, स्वास्थ्य बीमा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र है, जो देश के कुल गैर-जीवन बीमा प्रीमियम का लगभग 41% है.
उनके अनुसार, देश में लगभग 55 करोड़ लोग विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत आते हैं, जिनमें सशुल्क स्वास्थ्य बीमा, केंद्रीय स्वास्थ्य बीमा और राज्य स्वास्थ्य बीमा शामिल हैं. बाकी आबादी किसी भी स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत नहीं आती है. कोविड के बाद, स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता और महत्व को जनता ने काफी हद तक समझा है और इसकी मांग में काफी वृद्धि हुई है.

