नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्रों के पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों की पहचान करने का दावा किया था, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के डेटाबेस में मौजूद था। पुलिस के मुताबिक, इन लोगों की पहचान Facial Recognition System (FRS) के जरिए 20 से 26 जुलाई के बीच प्रदर्शन स्थल पर की गई थी। हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आया है कि सूची में शामिल कम से कम 25 लोग उस समय जेल में बंद थे, जब सिस्टम ने उन्हें जंतर-मंतर पर मौजूद बताया।
यह मामला दिल्ली पुलिस के Facial Recognition System की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल FRS के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। कार्रवाई से पहले ‘फील्ड वेरिफिकेशन’ किया जाएगा।
2,873 लोगों की पहचान का दावा
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द कर दी थीं। साथ ही अदालत ने सरकार को उन 2,873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी थी, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस ने आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया था।
दिल्ली पुलिस ने 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि प्रदर्शन के दौरान FRS की मदद से ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनकी तस्वीरें पुलिस के मौजूदा रिकॉर्ड से मैच हुईं। इनमें 2,402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के बायोमीट्रिक डेटाबेस ‘क्राइम कुंडली’ के जरिए और 471 लोगों की पहचान आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर किए जाने की बात कही गई।
हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पुलिस की इस सूची में शामिल गंभीर अपराधों के आरोपियों के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। इसमें हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म और POCSO जैसे मामलों से जुड़े 205 लोग शामिल थे।
गंभीर अपराधों से जुड़े 205 नाम
पुलिस की सूची में शामिल 205 लोगों में 101 हत्या के आरोपी, 61 दुष्कर्म के आरोपी, छह POCSO मामलों से जुड़े आरोपी और हत्या के प्रयास के मामलों में शामिल 62 लोगों में से 37 आरोपी थे।
इनमें से 25 लोगों के मामले में रिकॉर्ड यह दिखाता है कि FRS ने उन्हें जंतर-मंतर पर मौजूद बताया, जबकि वे उस समय जेल में बंद थे।
इन 25 लोगों में 17 हत्या के आरोपी, चार दुष्कर्म के आरोपी, दो POCSO मामलों से जुड़े आरोपी और चार हत्या के प्रयास के आरोपी बताए गए हैं।
तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेल में बंद थे 17 आरोपी
दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, इन 25 लोगों में से 17 आरोपी तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में बंद थे। इसके बावजूद FRS ने प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर उनकी मौजूदगी की पहचान की।
रिकॉर्ड के अनुसार, इनमें तीन लोगों की पहचान FRS ने 24 जुलाई, 21 लोगों की 25 जुलाई और एक व्यक्ति की 26 जुलाई को की थी।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति उस आधार पर दी थी कि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल पर मौजूद बताया था।
नादिर शाह हत्याकांड से जुड़ा आरोपी भी सूची में
पुलिस की सूची में शामिल लोगों में राजधानी के चर्चित जिम मालिक नादिर शाह हत्याकांड से जुड़ा एक आरोपी भी शामिल है।
दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या के मामले में योगेश उर्फ राजू को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, उस पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा के सिंडिकेट के लिए शार्पशूटर के तौर पर काम करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई थी और इस दौरान उसके बाएं पैर में गोली लगी थी।
पुलिस बोली- सिर्फ FRS के आधार पर नहीं होगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने द इंडियन एक्सप्रेस के सवालों के जवाब में कहा कि प्रदर्शन के दौरान 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। हालांकि, पुलिस ने यह भी कहा कि इन मामलों में आगे की जांच अभी बाकी है।
पुलिस का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल Facial Recognition System के मैच के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके लिए फील्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा।
FRS आमतौर पर तस्वीर या वीडियो में दिखाई देने वाले चेहरों के चारों ओर बॉक्स बनाकर उन्हें पुलिस के डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से मिलाता है। दिल्ली पुलिस ने 2022 में RTI के जवाब में बताया था कि सिस्टम में 80 फीसदी accuracy rate दिखने पर मैच को ‘पॉजिटिव’ माना जाता है। हालांकि, FRS का मैच अपने आप में किसी व्यक्ति की पहचान का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
सिस्टम की सटीकता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें एल्गोरिदम, कैमरे का एंगल, रोशनी, तस्वीर की गुणवत्ता, चेहरे पर मास्क और इस्तेमाल किए जा रहे डेटाबेस की गुणवत्ता शामिल हैं।
पुलिस के हलफनामे पर भी उठे सवाल
दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में था, जिनमें जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ज्यादा बल प्रयोग और निगरानी किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
पुलिस के जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, नॉर्थ जिले में सबसे ज्यादा 285 लोगों की पहचान की गई। इसके बाद आउटर में 257, नॉर्थ वेस्ट में 256, नॉर्थ ईस्ट में 174, ईस्ट में 173 और साउथ वेस्ट में 166 लोगों की पहचान किए जाने की बात कही गई।
सूची में रेलवे, शाहदरा, सेंट्रल, साउथ ईस्ट, वेस्ट, द्वारका, साउथ, रोहिणी, नई दिल्ली, क्राइम ब्रांच, IGI एयरपोर्ट, मेट्रो और स्पेशल सेल जैसी अन्य इकाइयों के नाम भी शामिल हैं।
हालांकि, पुलिस के हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सूची में शामिल लोग आरोपी, दोषी या केवल आपराधिक मामलों में नामजद व्यक्ति थे।
पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा है कि उसके रिकॉर्ड में गंभीर अपराधों के आरोपियों के चेहरे और अन्य जानकारी उपलब्ध हो सकती है, जबकि ट्रैफिक चालान या छोटे नियम उल्लंघनों जैसे मामलों के लिए ऐसी जानकारी उपलब्ध होना जरूरी नहीं है।

