अक्षय का मतलब होता है, कभी नहीं खत्म होने वाला। न उसका प्रभाव, न उसका फल, न उसका स्मरण। इसलिए इस विशेष तिथि पर ज्यादातर लोग विवाह के पवित्र बंधन में बंधते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अक्षय तृतीया पर शादी के बंधन में बंधना कितना शुभ माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
भारतीय संस्कृति और पुराणों में अक्षय तृतीया का काफी महत्व है। त्रेता युग की शुरुआत इसी तिथि से मानी जाती है। यही वह दिन है जब भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया और धर्म की फिर से स्थापना की थी। यही नहीं, इसके अलावा एक और कथा है कि इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था, जिससे प्रेम का यह दिन और भी विशेष बन जाता है।

