बारिश के मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इस समय नमी और गंदगी के कारण इन सब्जियों में बैक्टीरिया और अन्य संक्रमण जल्दी पनप सकते हैं। ऐसे में पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन इस मौसम में एक ऐसी पत्तेदार सब्जी भी होती है जो न सिर्फ सुरक्षित मानी जाती है, बल्कि स्वाद में भी लाजवाब होती है। यह है अरबी का पत्ता, जिसे आम बोलचाल में ‘घुइयां का पत्ता’ कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे टैरो लीव्स (Taro Leaves) कहा जाता है।
अरबी के पत्ते खास तौर पर मानसून के दौरान बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। इनमें पोषण भी भरपूर होता है। इनमें आयरन, फाइबर, विटामिन A और C जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। साथ ही, ये पत्ते पाचन के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इन्हें पकाने का तरीका भी खास होता है — आमतौर पर इन पत्तों को बेसन और मसालों के साथ लपेटकर पकाया जाता है, जिसे ‘पटौड़े’ या ‘अलूवड़ी’ कहा जाता है। यह व्यंजन देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
अरबी के पत्तों को पकाने से पहले अच्छे से धोना और सही तरीके से पकाना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद कैल्शियम ऑक्सालेट गले में जलन पैदा कर सकता है। सही विधि से पकाने पर यह समस्या नहीं होती और आप इसका स्वाद व सेहत दोनों का आनंद ले सकते हैं।

