अमेरिकी अपीलीय अदालत (यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट) ने 29 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया, जो राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थिति में कुछ शक्तियां देता है, लेकिन इसमें टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार शामिल नहीं है। यह फैसला ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने व्यापार घाटे, अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग की कमजोरी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों के आधार पर चीन, कनाडा, मैक्सिको, भारत और अन्य देशों पर टैरिफ लगाए थे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सभी टैरिफ अब भी लागू हैं! एक पक्षपाती अदालत ने गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन आखिरकार जीत अमेरिका की ही होगी|’ उन्होंने आगाह किया कि यदि टैरिफ हटा दिए गए, तो यह देश के लिए एक गंभीर संकट साबित हो सकता है, जिससे अमेरिका की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाएगी।

बता दें फैसले में दो प्रकार के टैरिफ पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- रेसिप्रोकल टैरिफ: अप्रैल 2025 में घोषित, जो व्यापार घाटे वाले देशों पर 10% से 50% तक के शुल्क लगाते थे।
- विशिष्ट टैरिफ: फरवरी 2025 में चीन, कनाडा और मैक्सिको पर लगाए गए, जिन्हें ट्रंप ने अवैध फेंटानिल तस्करी जैसे मुद्दों से जोड़ा था।
हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगे कुछ टैरिफ इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को 14 अक्टूबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय दिया है। ट्रंप ने इस फैसले को “पक्षपातपूर्ण” और “गलत” करार देते हुए कहा कि टैरिफ लागू रहेंगे और इसे हटाने से अमेरिका “नष्ट” हो जाएगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को ले जाने की बात कही है।
इसके अतिरिक्त, 12 से अधिक अमेरिकी राज्यों और कुछ व्यवसायों ने ट्रंप के टैरिफ को कानूनी चुनौती दी थी, जिसमें दावा किया गया कि ये टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ये टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ा सकते हैं और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।

