बिहार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, जन्माष्टमी, पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राज्य भर के मंदिरों में भव्य सजावट की गई है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। खासकर राजधानी पटना के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे महावीर मंदिर, इस्कॉन मंदिर और बांकीपुर के काली मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
इस बार जन्माष्टमी का पर्व विशेष संयोग में पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का जन्म छह शुभ योगों—वृषभ नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, चंद्रमा का वृषभ राशि में गोचर, अष्टमी तिथि, द्वार योग और सर्वार्थसिद्धि योग—में हो रहा है। इन शुभ योगों के कारण इस बार जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत फलदायी और मंगलकारी माना जा रहा है।
रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीकात्मक झांकी निकाली जाएगी। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां, भक्तिगीत और नृत्य-नाटिकाएं आयोजित की जा रही हैं। कई मंदिरों में भगवान को झूला झुलाया जा रहा है, वहीं कुछ स्थानों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया है, जिसमें युवाओं की भागीदारी उत्साहजनक रही।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस बल तैनात है और ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुचारू बनाया गया है। कुल मिलाकर पूरे बिहार में जन्माष्टमी का पर्व आस्था, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

