बिहार उपचुनाव का असर: अखिलेश यादव ने ब्राह्मण मतदाताओं पर फोकस बढ़ाया
Lucknow, 03:10pm – उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब ब्राह्मण समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। बुधवार को लखनऊ में पूर्व रेल मंत्री जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने की पुरजोर कोशिश की। उन्होंने PDA फॉर्मूले में ‘पी’ का अर्थ ‘पंडित’ बता दिया। अब तक सपा PDA को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक के रूप में परिभाषित करती रही है। अखिलेश ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने ब्राह्मणों को प्रताड़ित किया है। विकास दुबे के एनकाउंटर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सैटेलाइट इमेज से सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य और बटुकों से जुड़े मामलों को भी ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया। सपा नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ब्राह्मणों की हितैषी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सपा सरकार ने ही लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित की थी। इस बदलाव के पीछे बिहार के बांकीपुर उपचुनाव का असर माना जा रहा है। वहां भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद ब्राह्मण समुदाय में गुस्से के कारण बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। अब यूपी में भी राजनीतिक दल सवर्ण वोट बैंक पर ध्यान दे रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि अगर PDA में ‘पी’ का मतलब पंडित है तो पिछड़े वर्ग कहां गए?

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