अयोध्या में रामनवमी पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का यह दूसरा सूर्य तिलक है। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक के दौरान मस्तक पर 4 मिनट तक किरणें पड़ीं।
सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हो गया। मंदिर में आरती की गई। सूर्य तिलक से पहले कुछ देर के लिए रामलला के पट बंद किए गए। गर्भग्रह की लाइट बंद कर दी गई, ताकि सूर्य तिलक साफ नजर आए।
सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के पाइप से सिस्टम बनाया गया। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भ गृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई गईं।

