छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से शुरू हुआ नन विवाद अब दिल्ली और केरल तक पहुंच चुका है। 9 दिन पहले एक नाबालिग लड़की के बयान के आधार पर दो ननों – सिस्टर प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस – को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता पर दबाव डालकर जबरदस्ती उसका बयान बदलवाया।
पीड़िता ने दावा किया कि उसे पीटा गया और धमकाया गया ताकि वह अपने यौन शोषण के आरोप को वापस ले ले। यह मामला उस समय गरमा गया जब पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में पूरी कहानी बताई और आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थान में उसके साथ अत्याचार हुआ।
इस घटना के बाद ईसाई समुदाय ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए दुर्ग से लेकर दिल्ली और केरल तक प्रदर्शन किए। मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा। वहीं, चर्च से जुड़े संगठनों ने गिरफ्तारी को “धार्मिक भेदभाव” बताया।
बीते दिनों कोर्ट में सुनवाई हुई और 9 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद सिस्टर प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को जमानत मिल गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
इस केस ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी धार्मिक संस्थानों में हो रहे व्यवहार और वहां की आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर आगे आने वाली जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है।

