सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज से होने वाली मौतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इन घटनाओं को “बेहद चिंताजनक और डराने वाला” करार दिया। अदालत ने इस मुद्दे को लेकर स्वतः नोटिस जारी किया और सरकार से जवाब मांगा कि अब तक इस पर क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या योजना है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य का है, बल्कि समाज में सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जिस तरह से आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इनके हमले आम लोगों के जीवन के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, उससे एक व्यापक नीति की आवश्यकता है। कोर्ट ने विशेष रूप से उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें छोटे बच्चों और बुजुर्गों की मौतें हुई हैं, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग में आते हैं।
पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे इस समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या प्रयास कर चुके हैं, इसकी पूरी जानकारी दें। कोर्ट इस बात पर भी विचार कर रहा है कि क्या एक राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाई जानी चाहिए ताकि रेबीज के मामलों को रोका जा सके और आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।
इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की जाएगी, और तब तक अदालत सरकारों से जवाब तलब करेगी। कोर्ट का यह कदम आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

