पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार द्वारा लाए गए विवादास्पद “अपराजिता बिल” को राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है। यह निर्णय केंद्र सरकार की आपत्तियों के आधार पर लिया गया है। राजभवन के सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस बिल पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं, क्योंकि यह प्रस्तावित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में बदलाव करता है।
केंद्र सरकार का मानना है कि बिल में दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के लिए बेहद कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जो केंद्रीय कानूनों के अनुरूप नहीं है और इससे एक समान आपराधिक न्याय प्रणाली में बाधा आ सकती है। इसके अलावा, बिल की कई धाराएं भारतीय संविधान की व्यवस्था के खिलाफ भी मानी गई हैं।
यह बिल राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित कर 6 सितंबर 2024 को राज्यपाल को भेजा था। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजने से पहले ही इसमें कई खामियों की बात कही थी। राज्यपाल ने बताया कि यह कानून संघीय ढांचे और भारत की न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों से मेल नहीं खाता, इसलिए इसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजा गया है।
इस फैसले से राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। अब देखना होगा कि ममता सरकार इस बिल में संशोधन कर दोबारा लाती है या कोई नया कानून प्रस्तावित करती है।

