राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति हरिवंश ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई है जब सोमवार शाम को वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा दे दिया। उनकी अचानक यह घोषणा स्वास्थ्य कारणों को आधार बनाकर की गई थी, जिसे उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में स्पष्ट किया था ।
धनखड़ ने पत्र में उल्लेख किया कि चिकित्सीय सलाह एवं स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, वे “तत्काल प्रभाव से” अपने पद से त्यागपत्र दे रहे हैं, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 67(ए) में निर्धारित है । उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल एवं सभी सांसदों का सहयोग और समर्थन के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उनके अनुसार, उन्हें सांसदों से जो स्नेह मिला वह उन्हें जीवन भर स्मरण रहेगा, और भारत की प्रगति को उन्होंने अपने कार्यकाल में नजदीक से देखा।
इस इस्तीफे के साथ ही न केवल उपराष्ट्रपति का पद खाली हुआ, बल्कि राज्यसभा का सभापति भी रिक्त हो गया है, क्योंकि दोनों पद एक ही व्यक्ति द्वारा संभाले जाते हैं । अब चुनाव आयोग जल्द ही अधिसूचना जारी करेगा, जिससे नए उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर इस मौत से हलचल मची है। कुछ अटकलें हैं कि इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य से अधिक राजनीतिक कारण हो सकते हैं; विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग करते हुए इसपर सवाल उठाए हैं । कई राजनीतिक दलों ने इस अचानक निर्णय को लेकर चर्चा की है और भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार प्रारंभ कर दिए हैं।
इस बीच, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति से चर्चा के दौरान इस अचानक इस्तीफे की पृष्ठभूमि व संवैधानिक प्रक्रियाओं पर विचार किया। वे सरकार एवम् सभी पक्षों से संतुलनपूर्वक नई प्रक्रिया सुनिश्चित करवाना चाह रहे हैं।अंततः, दिन के इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि उच्चतम संवैधानिक पदों पर अचानक बदलाव की स्थिति में पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादाओं का विशेष महत्व होता है।

