आगरा में दो सगी बहनों के जबरन धर्मांतरण मामले में बड़ी सफलता मिली है। आगरा पुलिस ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता से दोनों बहनों को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में एक गैंग के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो धर्मांतरण में शामिल थे।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने जानकारी दी कि ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। इसमें एसीपी अरीब अहमद, इंस्पेक्टर राजीव त्यागी, भानु प्रताप सिंह, रीता यादव, एसआई योगेश नागर और अंकुर मलिक शामिल थे। इन्हें कोलकाता भेजा गया था। पुलिस टीम को सर्विलांस उपकरणों से लैस किया गया था—खास कैमरे उनकी शर्ट, पेन और टोपी में छिपाकर लगाए गए थे।
टीम ने कोलकाता की मुस्लिम बस्ती में पांच दिन तक गुप्त निगरानी की, जहां दोनों बहनों को रखा गया था। इस दौरान टीम ने वहां एक किराए के मकान में रहने की योजना बनाई और पूरी बस्ती की रेकी की। वहीं आगरा में दूसरी टीम को कोलकाता की गलियों के लाइव वीडियो दिखाए गए, ताकि दबिश के समय कोई दिक्कत न हो।
इस पूरे अभियान के दौरान आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आगरा लाने की प्रक्रिया भी काफी चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ इसे अंजाम दिया। यह कार्रवाई धर्मांतरण जैसे गंभीर अपराध के खिलाफ पुलिस की सतर्कता और समर्पण को दर्शाती है।

