यह समय झारखंड में धान रोपनी का है और गांव-गांव में खेतों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। झमाझम बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों को रोपनी के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिल गई हैं। किसान बड़ी मेहनत और उत्साह के साथ धान की रोपनी में जुटे हुए हैं। यह काम केवल खेती की प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक परंपरा और आस्था से भी जुड़ा हुआ है।
धान की रोपनी झारखंड की कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्सव के माहौल के साथ मनाया जाता है। खासकर महिलाएं खेतों में काम करते समय पारंपरिक गीत गाती हैं, जो पूरे वातावरण को आनंदमय बना देता है। इन गीतों और मेल-जोल के जरिए गांवों में एकता और सहयोग की भावना भी देखने को मिलती है।
इसी क्रम में राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने रांची जिले के चान्हो प्रखंड का दौरा किया और वहां किसानों के साथ धान की रोपनी में भाग लिया। उनके इस कदम को किसानों के मनोबल को बढ़ाने और खेती-किसानी को प्रोत्साहित करने के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री के खेत में उतरने से यह संदेश गया है कि सरकार किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। धान रोपनी का यह समय किसानों के लिए सिर्फ काम का नहीं, बल्कि उम्मीदों, आस्था और परंपरा से जुड़ा एक त्योहार भी है, जिसे पूरे उल्लास और सहयोग के साथ मनाया जाता है।

