हमारे आसपास और घर-परिवार में कई औसत जीवन व्यतीत करने वाले लोग रहते हैं। हालांकि, हममें से बहुत लोग औसत बनकर जिंदगी नहीं जीना चाहते हैं। अमेरिकी कॉमेडी टीवी सीरीज ’द ऑफिस’ का किरदार माइकल स्कॉट कहता है, ‘मेरी मां हमेशा कहती थीं कि औसत लोग सबसे खास हैं। यही कारण है कि भगवान ने इतने सारे बनाए।’
यह शब्द ‘डिक्शनरी ऑफ ऑब्सक्योर सॉरोस’ से लिया गया है। सच तो यह है कि ‘औसत’, ‘साधारण’ या ‘बेमिसाल’; जैसे शब्द सबके लिए अलग-अलग हैं। हम सब किसी काम में औसत हो सकते हैं और किसी काम में निपुण।
हालांकि, कोइनोफोबिया खासतौर पर उस डर को दर्शाता है कि आपकी जिंदगी ऐसी हो जाएगी जो किसी के लिए यादगार न हो। क्या आप भी इस डर से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो चिंता न करें।

