आज के ही दिन जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता रहे डॉ. मुखर्जी की रहस्मय तरीके से 1953 में जम्मू-कश्मीर में हिरासत में मौत हुई थी|72 साल भी उनकी मौत का न रहस्य खुला और न ही कोई जांच हुई|आधिकारिक तौर पर उन्हें हिरासत में दिल का दौरा आया था और उनकी मौत श्रीनगर में हुई थी लेकिन कई अनसुलझे सवाल और साज़िश के आरोप आज भी ताजे हैं। उस घटना से देश पूरा हिल चुका था|
आज देशभर में अलग-अलग राज्यों में भाजपा नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं|

⚠️ रहस्यमय पहलू और संदेह
1. इलाज और इलाज की प्रक्रिया
- उन्हें हिरासत में रखने के बाद सुनसान किसी कॉटेज में रखा गया जहां उनकी सेहत बिगड़ती गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, 19‑20 जून की रात उन्हें संक्रमण (dry pleurisy) हुआ, जिसे स्ट्रेप्टोमाइसिन इंजेक्शन से इलाज किया गया, हालांकि उनके परिवार का कहना था कि यह दवा उनके लिए उचित नहीं थी
- फिर, 22 जून को वे दिल के दर्द और पसीने के साथ बेहाल हुए; उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ ‘प्रोविजनल हार्ट अटैक’ की रिपोर्ट बनी और अगले दिन सुबह 3:40 बजे मौत हुई
2. ज़हर की अफ़वाह और सरकारी तौर पर जांच का अभाव
- कई समर्थक दावा करते हैं कि उन्हें स्ट्रेप्टोमाइसिन नहीं बल्कि कुछ ज़हर दिया गया, और उनके शरीर के नील रंग को जहर का संकेत बताया जाता है ।
- उनकी माँ, जोगमाया देवी, ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग की, लेकिन नेहरू ने यह कहते हुए मना कर दिया कि “कोई रहस्य नहीं” ।
3. राजनीतिक विवाद और साज़िश के आरोप
- भाजपा के वरिष्ठ नेताओं जैसे अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि यह “नेहरू‑अब्दुल्ला‑साज़िश” थी और मुकुट की गिरफ्तारी और मृत्यु पूर्व नियोजित थी ।
- नरेंद्र मोदी और जे. पी. नड्डा समेत अन्य नेताओं ने भी कहा कि नेहरू ने जांच से इंकार कर दिया और इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई
4. अदालतों में उठती मांगें
- अभी हाल ही में, 2021 में, कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर हुई, जिसमें मुकुंद की मौत की जांच और संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की गई
🧾 सारांश तालिका
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| मृत्यु की तिथि-समय | 23 जून 1953, सुबह 3:40 बजे |
| ऑफिशियल कारण | हार्ट अटैक हिरासत में |
| इलाज और परिस्थितियाँ | स्ट्रेप्टोमाइसिन इंजेक्शन, अस्पष्ट मेडिकल देखभाल |
| संभावित संदेह | ज़हर देने का आरोप, धर्मशाला जैसी जगह में रखे जाने की आशंका |
| राजनीतिक आरोप | नेहरू–अब्दुल्ला साज़िश के संकेत, भाजपा नेताओं द्वारा उठाए गए सवाल |
| जांच की मांगें | परिवार, भाजपा, कोर्ट—लंबे समय से मांग |
निष्कर्ष
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की आधिकारिक कहानी “दिल का दौरा” बताती है, लेकिन दवाओं का चुनाव, अकेले कॉटेज में भर्ती, परिवार की नाराज़गी, राजनीतिक आरोप और लगातार जांच की मांगें—सब मिलकर इस घटना को संदिग्ध बना देती हैं। अप्रैल 2025 तक तक कोई निष्कर्ष या स्वतंत्र आयोग रिपोर्ट जारी नहीं हुई है।

