पिछले कुछ समय से भाषाओं को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में खूब विरोध हो रहा है|चाहे तमिलनाडु हो ,कर्नाटक हो या महाराष्ट्र हो | ये राज्य वे है जहां लंबे समय से बीच-बीच में विरोध उठता रहता है लेकिन कुछ समय से ये विरोध उफान पर है|
अब महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी भाषा बनाने का कदम उठाया है जिसके बाद विपक्ष, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और मराठी भाषा के कार्यकर्ता इसका खूब विरोध कर रहे हैं|दरअसल राज्य सरकार ने एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया और अपने अप्रैल में जारी जीआर में संशोधन किया है|
अप्रैल में जीआर में हिंदी को तीसरी भाषा को अनिवार्य बना दिया था लेकिन अब संशोधन के बाद कहा गया है कि हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगी|

