‘मेरी बेटी 29 मार्च को अचानक लापता हो गई। दोस्तों, रिश्तेदारी सब जगह ढूंढा। उसके दोस्त दानिश और आयुष को भी फोन किए। 4 अप्रैल की सुबह पुलिस ने मेरी बेटी को घर पहुंचाया। वह बेसुध थी, हालत बिल्कुल ठीक नहीं थी।’
बेटी के साथ हुई घटना को बयां करते वक्त पिता भावुक हो जाते हैं। खुद को संभालते कहते हैं- आप समझिए, उसको नॉर्मल होने में 48 घंटे लगे। फिर उसने जो कुछ बताया, वह सुनकर हम लोगों का दिल बैठ गया।
मेरी बेटी के साथ 6 दिन में 23 लड़कों ने हैवानियत की, फिर सड़क किनारे फेंक दिया। पुलिस ने पहले हमारी मदद तक नहीं की। फिर मीडिया के दबाव में 7 अप्रैल को FIR दर्ज की। बेटी अब घर के लड़कों को भी देखकर चीख उठती है।

