बिजली के निजीकरण के विरोध में लखनऊ में बुधवार को 10 राज्यों के विभागीय कर्मचारी पहुंच रहे हैं। यहां पांच हजार से ज्यादा कर्मचारी इकट्ठा होकर रैली निकालेंगे। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार 42 जिलों की बिजली निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है।
इससे पूर्वांचल-दक्षिणांचल कंपनी के डेढ़ करोड़ उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इसके अलावा दोनों कंपनियों के 75 हजार नियमित और संविदा कर्मियों की नौकरी भी खतरे में बताई जा रही है। विद्युत अभियंता संघ के अध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि रैली में बिजली कर्मचारियों के शामिल होने से बिजली व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

