अगले 25 वर्षों में कचरे की मात्रा दोगुनी होने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन पर चिंता के दौरान यह माना जाता रहा है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए जिम्मेदार मीथेन गैस के सृजन का तीसरा सबसे बड़ा कारक कचरा ही है।
बढ़ते शहरीकरण के चलते हर सप्ताह पेरिस के समकक्ष एक नया शहर दुनिया में पैदा हो जाता है और उसके बनने के साथ-साथ कचरा उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होती है। शहर बनने की प्रक्रिया में जहां एक ओर निर्माण एवं विध्वंस संबंधी कचरे से लैंडफिल पर कूड़े के पहाड़ बन जाते हैं, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण भी होता है।
नतीजतन उपभोक्ता ने स्वयं को व्यवस्था में मात्र कूड़ा पैदा करने वाले तक सीमित कर लिया। यदि तेजी से कचरे की मात्रा को कम करने का लक्ष्य हासिल करना है, तो कचरा उत्पादकों पर वजन आधारित शुल्क अदायगी को लागू करना प्रथम कदम होना चाहिए। अन्यथा वर्तमान व्यवस्था एवं समाज के रहते शून्य कचरा तो दूर, पहले की तरह ही कचरे के विशाल पहाड़ बनते जाएंगे।
किसी भी वस्तु को खरीदने से पहले उसके पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार किया जाए एवं अनावश्यक खरीद को नकारा जाए। हमारे व्यवहार में बदलाव आते ही कचरे की मात्रा कम हो जाएगी।

