पूरा देश आज मदर्स डे की शुभकामनाएं अपने-अपने तरीके से मना रहे है तो वही देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मां के स्नेह और त्याग को समर्पित करते हुए एक लेख लिखकर पोस्ट किया।
उन्हेंने कहां की, बचपन में कोई अतिथि या गुरुजन हमारे घर आते तो बातों-बातों में पूछते, ‘बोलो तो बेटी, पिताजी ज्यादा अच्छे हैं या मां?’ मैं एक बार पिताजी की ओर देखती, एक बार मां की ओर। फिर झट से बोल देती, ‘मां ज्यादा अच्छी है।’ मां ज्यादा अच्छी है कहने का मतलब यह नहीं है कि पिताजी अच्छे नहीं हैं।
अपनी नन्हीं-सी बुद्धि से मैंने सिर्फ इतना समझा था कि दुनिया में मां का स्थान कोई नहीं ले सकता। बड़ी होकर मेरी गृहस्थी बसी, मैं मां बनी। मां बनने के बाद मैंने समझा- संतान का मुंह देखकर जीवन के सारे दुःख-कष्ट भूल जाना ही मातृत्व है। मां हमेशा यही दुआ करती है कि उसके बच्चे अच्छे इंसान बनें, अपने पैरों पर खड़े हों।

