साल 2004 में थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से में अलग मुस्लिम देश ‘पट्टानी’ के लिए भारी प्रदर्शन हो रहे थे। मुस्लिम बहुल नरथिवात राज्य में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 6 लोगों को गिरफ्तार किया। 25 अक्टूबर को इनकी रिहाई के लिए 2000 से ज्यादा मुस्लिम एक पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हो गए।
अलगाववादियों और पुलिस में टकराव तेज हुआ। तब PM रहे थाकसिन शिनवात्रा ने इसे सख्ती से कुचलने का आदेश दिया। पुलिस ने हजारों लोगों को जबरन पकड़कर, उन्हें निर्वस्त्र किया और उनके हाथ पीठ के पीछे बांध दिए। उन्हें 26 ट्रकों में ठूंसकर 150 किमी दूर एक आर्मी कैंप भेज दिया गया।
7 घंटे बाद जब उन्हें कैंप में उतारा गया तो इनमें से 78 की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। इस घटना से थाईलैंड सरकार की काफी आलोचना हुई। अलगाववादियों का समर्थन कर रहे मलेशिया ने भी इस पर नाराजगी जताई। हालांकि, इस घटना ने थाईलैंड की बौद्ध बहुल जनता के बीच थाकसिन को लोकप्रिय बना दिया। लोगों को लगा कि थाकसिन ही वो शख्स हैं, जो देश को एकजुट रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

