अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों का F-1 वीजा रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद अब भारतीय और चीनी छात्रों ने मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
इन छात्रों ने अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और अन्य इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) की ओर से यह केस न्यू हैम्पशायर की US डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया है।
छात्रों का कहना है कि वीजा रद्द करने का यह निर्णय एकतरफा और अवैध है, जिससे उनकी शिक्षा, भविष्य की नौकरी और अमेरिका में कानूनी रूप से रहने का अधिकार छिन गया है। ACLU ने अपने बयान में कहा है कि यह मामला केवल इन छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका में रह रहे हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के भविष्य का है।
मुकदमे में कहा गया है कि अचानक वीजा स्टेटस खत्म कर देने से छात्र डिपोर्टेशन और डिटेंशन के खतरे में आ गए हैं। मामले में 3 भारतीय और 2 चीनी छात्र शामिल हैं, जिन्होंने कोर्ट में अपनी बात रखी है।

