जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। आगे जाने वाले हमेशा अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेते हैं। परंतु पीछे रह जाने वाले अक्सर तनाव से घिर जाते हैं।
हालांकि इसका अर्थ है यह नहीं कि वह नाकाम है। दरअसल, कई बार दिन रात कड़ी मेहनत के बाद भी मनचाहे परिणामों की प्राप्ति नहीं होती हैं। ऐसे में मन में लगातार नकारात्मकता का भाव बना रहता है। ये भाव व्यक्ति की सोच को प्रभावित व उसकी कार्यक्षमता पर गहरा असर डालता है। ऐसी परिस्थिति में स्वयं को सकारात्मक बनाए रखना अपने में बड़ी चुनौती हैं।
बता दें, आचार्य चाणक्य की गणना महान विद्वानों के रूप में की जाती है, उन्होंने चाणक्य नीति नामक ग्रंथ की रचना कि है, जिसमें मनुष्य जीवन से लेकर उसकी सफलता-असफलता का भलिभांति जिक्र है। इस नीति शास्त्र में उन बातों का भी उल्लेख हैं,

