हिंदू धर्म में नारी शक्ति की उपमा जब भी दी जाती है, तो सबसे पहले जिनका नाम स्मरण होता है, वह हैं सती अनुसूया। वे तप, त्याग और पतिव्रता धर्म की मूर्ति थीं। बैसाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सती अनुसूया जयंती मनाई जाती है और इस वर्ष यह पावन तिथि 17 अप्रैल को आ रही है।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सती अनुसूया ने नारी धर्म की ऐसी पराकाष्ठा को सिद्ध किया, जिसे आज तक कोई लांघ नहीं सका। वे प्रजापति कर्दम और देवी देवहूति की पुत्री तथा महर्षि अत्रि की धर्मपत्नी थीं। उन्होंने कठोर तप करके मंदाकिनी नदी को धरती पर अवतरित किया। कहा जाता है कि उनके तेज से आकाशमार्ग से गुजरते देवता तक प्रभावित होते थे।

